राष्ट्रीय हिमालयन अध्ययन मिशन परियोजना के अन्तर्गत राज्य में आजीविका वर्धन हेतु बांस एवं रिंगाल संसाधनों पर आधारित एक विचार मंथन सत्र का आयोजन

उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) द्वारा राष्ट्रीय हिमालयन अध्ययन मिशन परियोजना के अन्तर्गत राज्य में आजीविका वर्धन हेतु बांस एवं रिंगाल संसाधनों पर आधारित काश्तकारों के सामाजिक आर्थिक उन्नयन हेतु उनके द्वारा बनाये जाने वाले पारम्परिक उत्पादों के मूल्यवर्धन, क्षमता विकास एवं विपणन हेतु श्रृंखला विकास की प्रक्रिया पर आधारित एक विचार मंथन सत्र का आयोजन किया गया।

उद्घाटन सत्र में यूसर्क की निदेशक प्रो0 (डा0) अनिता रावत ने कहा कि यूसर्क राज्य के विकास से सम्बन्धित विज्ञान, शिक्षा एवं तकनीकी के माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं के द्वारा दुर्गम क्षेत्र तक लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने बास व रिंगाल के संसाधनों के काश्तकारों को आजीविका का महत्वपूर्ण संसाधन होने के साथ पर्यावरणीय दृष्टि व सामुदायिक विकास के साथ-साथ रोजगार का अति उत्तम संसाधन है जिसको ध्यान में रखते हुये यूसर्क द्वारा हिमालयन अध्ययन मिशन परियोजना के अन्तर्गत बासं एवं रिंगाल सेक्टर के विकास से सम्बन्धित श्रृंखला विकास पर कार्य किया जा रहा है और आज के इस सत्र में सभी हित्धारकों द्वारा उनके महत्वपूर्ण सुझाव भविष्य में निति निर्धारण में सार्थक होंगे। उनके द्वारा बांस के निष्काशन हेतु सतत् प्रबन्धन, बहुद्देशीय प्रजातियों के वृक्षारोपण एवं काश्तकारों को उच्च किस्म के उत्पादों को बनाने में प्रशिक्षण प्रदान करने एवं उन्हें विपणन की व्यवस्था से जोड़ने हेतु उचित माध्यम की आवश्यकता बतायी।

परियोजना अन्वेषक डा0 मन्जू सुन्दरियाल के प्रस्तुतिकरण के द्वारा बताया गया कि बांस एवं रिंगाल के पारम्परिक उद्यम को नये स्वरूप की आवश्यकता को देखते हुये उत्पादों का मूल्यवर्धन एवं काश्तकारों की क्षमता विकास अत्यन्त आवश्यक है जिसके द्वारा रोजगार के संसाधन उपलब्ध होने के साथ-साथ पलायन की समस्या, इको फ्रेंडली उद्यम व प्लास्टिक के उत्पादों को कम किया जा सकता है व बांस एवं रिंगाल के क्षेत्र में एक मिशन मोड में कार्य करने पर जोर दिया।

विचार मंथन सत्र के मुख्य वक्ता  एस0टी0एस0 लेप्चा, पूर्व मुख्य वन अधिकारी द्वारा राज्य में बांस एवं रिंगाल की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया व भविष्य की सम्भावनाओं में क्लस्टर एप्रोच, उद्यमिता विकास, गृह एवं इंडस्ट्री निर्माण पर जोर दिया जो बांस एवं रिंगाल के उद्यम को नयी दिशा प्रदान करने में सहायक सिद्ध होंगे।

फाॅरेस्ट इन्स्टीट्यूट के वैज्ञानिक डा0 अजय ठाकुर द्वारा बताया गया कि वर्तमान में बांस से सम्बन्धित उपलब्ध डेटा में संशोधन एवं बांस के प्रबन्धन में उचित हारवेस्टिंग की विधि को अपनाना आवश्यक है।

बाॅटनीकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक डा0 मनीष कंडवाल ने बांस की मुख्य प्रजातियों के बारे में बताया जिनके संरक्षण एवं वृक्षारोपण राज्य के विकास में सहायक सिद्ध होंगे।

आगास संस्था के अध्यक्ष  जे0पी0 मैठाणी के द्वारा इस उद्यम पर आधारित काश्तकारों के आय सृजन हेतु सरकार द्वारा प्रशिक्षण प्रदान करने व बाजार उपलब्ध कराने हेतु कहा गया।  दिनेश जोशी जी द्वारा बांस के क्षेत्र में नई रणनीति बनाने एवं संसाधन के मैपिंग की बात कही गयी।श्री नरेन्द्र सिंह द्वारा बांस के उद्यम को आर्थिक उन्नयन हेतु पर्यटन से जोड़ने का सुझाव दिया गया।

सरस्वती जन कल्याण संस्थान के अध्यक्ष डा0 ए0डी0 डोभाल  के द्वारा बांस एवं रिंगाल के संसाधनों के उपलब्ध होने की समस्या को बताया जिसके लिये वृहद स्तर पर वृक्षारोपण की आवश्यकता बतायी। कार्यक्रम में श्रीमती बीना सिंह एवं पूनम के द्वारा भी महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान किये गये।कार्यक्रम के अन्त में परियोजना अन्वेषक डा0 मन्जू सुन्दरियाल द्वारा संस्तुतियों के साथ सभी को धन्यवाद ज्ञापन दिया गया।

 

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